Founder

शुभ सन्देश

उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करने के उद्देश्य से ज्ञानोदय महाविद्यालय की स्थापना मड़ियाव के हरे-भरे, सुरम्य प्राकृतिक वातावरण में की गई है। सत्रण्‍ 2005-2006 से प्रारम्भ हुये इस महाविद्यालय का संचालन रजिस्ट्रेशन ऐक्ट-1861 के अन्तर्गत पंजीकृत कमेटी फार सर्विसेज एण्ड डेवलेपमेण्ट द्वारा किया जा रहा है। लखनऊ ट्रान्स गोमती क्षेत्र के मड़ियांव क्षेत्र में यह सहशिक्षा महाविद्यालय है। प्रदेश के प्रख्यात शिक्षाविद् एवं समाजसेवी इस संस्था के सदस्य है, जिनके मार्गदर्शन में छात्र-छात्राओं में निहित अनन्त शक्तियों के प्रस्फुटन का प्रयास किया जाएगा। लखनऊ विश्वविद्यालय से सम्बद्ध इस महाविद्यालय में सुयोग्य और अनुभवी शिक्षकों का चयन किया गया है। छात्र-छात्राओं के व्यक्तित्व का बहुमुखी विकास हो और उनके अन्दर आत्मसम्मान एवं स्वावलम्बन की भावना बलती हो।

पुस्तलाकय : महाविद्यालय में ज्ञान-विज्ञानण्‍ खेल-कूद मनोरंजन एवं साहित्य से सम्बन्धित पुस्तकों का भण्डार है। पुस्तकालय की साज-सज्जाण्‍ रख-रखाव और वितरण व्यवस्था अत्यधुनिक है। प्रशिक्षित और अनुभवी पुस्तकालयाध्यक्ष की व्यवस्था की गई है। छात्र-छात्राओं के ज्ञान का विस्तार हो और वे देश-विदेश के घटनाक्रम से परिचित होंण्‍ इस उद्देश्य से समाचार पत्रों तथा पत्र-पत्रिकाओं से सुसज्जित वाचनालय की समुचित व्यवस्था की गई है।

क्रीडा़स्थल : छात्र-छात्राओं की खेल प्रतिभा को उभारने उन्हें अन्तरोज्यीय राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्द्धाओ में शामिल होने के लायक बनाने के उद्देश्य से महाविद्यालय में सुयोग्य खेल प्रशिक्षक और खेल उपकरण की व्यवस्था की गई है समतल खेल का मैदान समय सारिणी के अनुसार छात्र-छात्राओं के लिए उपलब्ध रहेगा। योगय खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के लिए महाविद्यालय उन्हें यथा सम्भव सहयोग भी प्रदान करेगा।

शिक्षणेतर क्रियाकलाप : छात्र-छात्राओं के बहुआयामी विकास हेतु महाविद्यालय में समय-समय पर विविध सांस्कृतिक कार्यक्रम, वाद-विवाद प्रतियोगिता, विचार गोष्ठियाँ, निबन्ध-लेखन,तत्क्षण भाषण के आयोजन किए जाएंगे। छात्राओं के लिए संगीत (गायन एवं वादन) और नृत्य की विशेष व्यवस्था है।

निर्धन छात्रों की सहायता : ऐसे मेधावी और निर्धन छात्र-छात्राओं, जो शिक्षण शुल्क देने तथा पाठ्य पुस्तक आदि खरीदने में अक्षम हैं, उनको महाविद्यालय द्वारा छात्रवृत्ति प्रदान की जायेगी। हमारा उद्देश्य है कि धनाभाव के कारण कोई मेधावी छात्र-छात्रा गुणवत्ता परक शिक्षा से वंचित न रह जाए।
शिक्षक : विश्वविद्यालय अनुदान आयोग और उत्तर प्रदेश सरकार के मानकों के अनुरूप सुयोग्य और शिक्षकों का चयन किया गया है।